Wednesday, May 9, 2012

Punjabi Kolkata Times: एक जुलाई को कोलकाता में शुरू होगी डीटीएच सेवा

Punjabi Kolkata Times: एक जुलाई को कोलकाता में शुरू होगी डीटीएच सेवा:  अब  खुले बाजार से सेट टॉप बाक्स खरीदा जा सकेगा। ग्राहकों को केबल आपरेटर या मल्टी सिस्टम आपरेटर (एमएसओ) से बाक्स खरीदना बाध्यतामूलक नहीं...

आर्थिक संकट में ममता ने इफ्तार में खर्च किए 41 लाख रुपए



 आर्थिक संकट के कारण कई आवश्यक खर्चों में कटौती की जा रही है। लेकिन ऐसे दौर में भी कोलकाता नगर निगम की ओर से खानपान में ही लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। एक ओर विकास के कार्यो पर पाबंदी तो दूसरी ओर मेयर परिषद के सदस्यों की बैठक में ही कभी 34 हजार रुपए तो कभी 26 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि यह सारा खर्च 15-20 लोगों के खानपान पर ही खर्च किया जा रहा है। इस बारे में नगर निगम के वित्त विभाग की ओर से जांच की गई। पता चला है कि डिप्टी मेयर समेत मेयर परिषद के दफ्तरों में कुल मिलाकर 20 लोग रहते हैं। जबकि यहां होने वाली बैठक के दौरान 80 से लेकर 90 पैकेट भोजन आता है। इस पर अतिरिक्त 20-25 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। इतना ही नहीं निगम के दूसरे आयोजनों में भी खानपान पर भारी खर्च हो रहा है।
मालूम हो कि कोलकाता नगर निगम में परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस ने 2010 में सत्ता संभाली थी। तब से लेकर अप्रैल 2012 तक मेयर परिषद की 32 बैठकें हुई है। हिसाब के मुताबिक महज खानपान के लिए ही इन बैठकों पर छह लाख रुपए की रकम खर्च हुई है। इस बारे में एक पार्षद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मेयर परिषद की बैठक हर हफ्ते होनी चाहिए, लेकिन ऐसा होता तो निगम का कबाड़ा हो जाता। यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि हर बार 60 से 70 लोगों के लिए खाना क्यों मंगवाया जा रहा था।
कोलकाता नगर निगम के पूर्व तृणमूल कांग्रेस के मेयर सुब्रत मुखर्जी भी खर्च के बारे में सुनकर हैरान हैं। उनका कहना है कि हमारे समय में मेयर परिषद की बैठक में मुश्किल से एक हजार रुपए से लेकर 1200 रुपए तक खर्च होते थे। इसका कारण यह था कि ज्यादा से ज्यादा 15 लोग ही बैठक में उपस्थित रहते थे।
नगर निगम सूत्रों का कहना है कि आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त 2011 में ही विभिन्न सभा, समागम में 50 लाख रुपए खर्च किए गए थे। जबकि इसमें से ज्यादातर खर्चे निगम को खर्च ही नहीं किए जाने थे। इसमें सबसे पहले पार्क सर्कस इलाके में इफ्तार पार्टी शामिल है। यह आयोजन 12 अगस्त को किया गया था। इसके लिए निगम की ओर से 41 लाख रुपए खर्च किए गए थे। निगम ने इफ्तार पार्टी के लिए 7400 लोगों के लिए एक रेस्टोरेंट से खाने के पैकेट मंगलाए थे। एक पैकेट की कीमत 285 रुपए थी। कर और पैकेट आपूर्ति में कुल मिलाकर 23 लाख रुपए खर्च हुए जबकि मंच और लाइटिंग में 18 लाख रुपए खर्च किए गए।
इसी तरह महानगर की विभिन्न पूजा कमेटियों के अधिकारियों को लेकर की गई एक बैठक की भी चर्चा है। 17 अगस्त को यह बैठक पूजा से पहले हुई थी। लगभग पांच हजार लोगों के लिए नाश्ते में सवा दो लाख रुपए और मंच के खर्चे मिलाकर लगभग पांच लाख की राशि खर्च की गई थी। इसके बाद दो मई 2012 में टाउन हाल में नगर निगम की ओर से चार दिवसीय रवींद्र जयंती का आयोजन किया गया था। इस मौके पर कुल मिलाकर 15 लाख 70 हजार रुपए खर्च किए गए।
नगर निगम अभी तक महानगर में सभी लोगों तक शुद्ध पेय जल पहुंचाने में सफल नहीं हो सका है। अभी गर्मी का प्रकोप शुरू ही हुआ है कि कई जगह जल संकट देखा जा रहा है। बस्ती विकास का काम भी ठप पड़ा है। रास्तों की मरम्मत भी नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है कि आर्थिक संकट के कारणऐसा हो रहा है। कई जगह निकासी काकाम भी रुका हुआ है। हालांकि नगर निगम का कोई अधिकारी इस बारे में कुछ कहने के लिए तैयार नहीं है कि जब आवश्यक काम रुके पड़े हैं ऐसे में गीत-संगीत और खानपान पर खर्च किया जाना कितना जरूरी है।

एक जुलाई को कोलकाता में शुरू होगी डीटीएच सेवा




 अब  खुले बाजार से सेट टॉप बाक्स खरीदा जा सकेगा। ग्राहकों को केबल आपरेटर या मल्टी सिस्टम आपरेटर (एमएसओ) से बाक्स खरीदना बाध्यतामूलक नहीं रह गया है। इस बारे में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के विरोध के बावजूद आगामी एक जुलाई से कोलकाता में टीवी का डिजीटलाइजेशन चालू हो रहा है। इसके लिए टीवी दर्शकों को या तो डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) सेवा का सहारा लेना होगा नहीं तो  सेट टॉप बाक्स खरीदना पड़ेगा।
लेकिन कोलकाता, हावड़ा के हजारों लोग बाक्स की खरीद के लेकर परेशान हैं। इसका कारण यह है कि 500 रुपए में बिकने वाले बाक्स की कीमत विभिन्न इलाकों में बढ़ते हुए एक हजार तक पहुंच गई है। इस बारे में कोलकाता के एक एमएसओ का कहना है कि 30 जून तक किसी भी एमएसओ के लिए सभी घरों में बाक्स की आपूर्ति संभव नहीं है। इसका कारण यह है कि उनका निर्माण भारत में नहीं विदेश में होता है। इसलिए जैसे जैसे अंतिम तिथि नजदीक आती जा रही है इसकी कीमतें बढ़ती जा रही हैं। उनका मानना है कि आम लोगों के लिए ही सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि बाजार में मिलने वाले बाक्स की गुणवत्ता की गारंटी कौन लेगा।
मालूम हो कि नई व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार का कहना है कि एमएसओ एक सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करगा जिससे आर्थिकलेन-देन और ग्राहकों की पसंद का पता चल सके। उनसे बाक्स खरीदने पर ठिकाना बदलने पर उसे वापस दिया जा सकेगा। लेकिन यह ठिकाना उसी एमएसओ के तहत हो तो ट्रांसफर वाउचर से बाक्स बदला जा सकेगा। आपरेटर की सेवा से ग्राहक संतुष्ट नहीं हो तो उसे बाक्स वापस देने का अधिकार होना चाहिए। लोगों की शिकायतों के लिए अलग एक विभाग होना चाहिए।
ट्राई के मुताबिक फ्री टू एयर के 100 चैनल में ग्राहकों को चैनल चुनने की सहूलत होगी। इसके लिए एकसौ रुपए महीने का भुगतान करना होगा। लेकिन पे चैनल लेने पर भी अधिकतम राशि 150 रुपए  होनी चाहिए। इसके लिए कम से कम 200 चैनल दिखाने की क्षमता एमएसओ को होनी चाहिए।
हालांकि अभी समस्यायह है कि खुले बाजार में सेट टाप बाक्स कहां से मिलेगा और उसकी तकनीक एमएसओ से तालमेल बना सकेगी या नहीं। चैनलों का पैकेट क्या होगा और बाक्स केबल आपरेटर से खरीदा जाए तो कीमत क्या होगी। इसे लेकर लोग अभी भी परेशान हैं। हालांकि ग्राहकों का एक बड़ा हिस्सा डीटीएच सुविधाएं ले रहा है क्योंकि इसमें उन्हें ज्यादा विकल्प दिए जा रहे हैं।

Sunday, May 6, 2012

Clinton arrives in India

Hillary
Kolkata, US Secretary of State Hillary Clinton
arrived in Kolkata today in the first leg of her three-day
visit to the country.
During her two-day stay in the city, she will meet West
Bengal Chief Minister Mamata Banerjee among other engagements.
Clinton, who had earlier been to the city after Mother
Teresa's death in 1997 as the First Lady of the United States
of America, was received by senior state government officials
and US Ambassador to India Nancy Powell.
Clinton arrived here from Bangladesh capital Dhaka and
is tentatively scheduled to attend a programme at the Indian
Council for Cultural Relations on issues relating to women.
She would later visit the Victoria Memorial.
On Monday morning, Clinton is likely to attend a programme
with a cross-section of society, Amercian Center sources said.
Clinton would leave for Delhi after meeting the chief
minister at the state secretariat, Writers Buildings.
Unprecendented security arrangements have been made
along the routes she would take and at places she would visit.
A large number of policemen were deployed and restrictions
imposed on roads leading to the hotel, where she would stay,
from the Netaji Subhash Chandra Bose International Airport.

Wednesday, February 22, 2012

Vice-President pays tribute to 'Agyeya'




Hindi litterateur Sachidananda Hiranand Vatsyayan Agyeya,
Vice-President Hamid Ansari today said the range of his
interest and deep philosophical underpinnings of his output
had established him as a literary figure in the footsteps of
Rabindra Nath Tagore.
"Agyeya was a polyglot, well-versed in Hindi, English,
Sanskrit and Persian. He was a patriot and a revolutionary
freedom fighter on whom Chandrashekhar Azad left a deep
impression," Ansari said speaking at a function here to mark
the birth centenary of the poet, popularly known as 'Agyeya'.
Describing Agyeya as one of the greatest writers in
Hindi literature and a source of inspiration, Ansari said the
writer believed that poetry on politics was the best use of
poetry.
''Yet he was careful to draw the distinction and warn
that patriotic poetry should not lead to an overemphasis on a
religious-spiritual, ethnic or even religious nationalism. On
the other hand, being completely anti-political too was not a
solution,'' he said.
The Vice-President said that the poet strived to make
Hindi a vibrant, volatile, alive and growing language - not a
"standard, well-regulated and universally accessible form",
which, he felt, would only be good for official notifications
and regulations.
"Agyeya also bemoaned the fact that as our social and
political life became complex, it has become very difficult to
focus popular ire. Power and exercise of power has become more
diffused," the Vice-President said.

Friday, February 17, 2012

दो मंजिला एसी ट्रेन को नहीं मिल रहे यात्री


 हावड़ा से धनबाद  के बीच रेलवे की ओर से धूमधाम के साथ दो मंजिला ट्रेन शुरू की गई थी, पहली एसी दो मंजिला ट्रेन के बारे में माना जा रहा था कि इसे रेलयात्रियों को भरपूर सहयोग मिलेगी। पहले इसे सुबह धनबाद से चलाया जा रहा था लेकिन बाद में हावड़ा से सुबह ट्रेन चलाई जाने लगी। रेलवे की ओर से तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी की महत्वाकां्क्षी योजना के तहत  बड़ी उम्मीद के साथ चलाया था। लेकिन अब वो उम्मीद धुंधली होती दिख नजर आ रही है। इसका कारण यह है कि डबल डेकर की अधिकांश सीटें खाली रहती हैं।
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को हावड़ा से धनबाद जा रही डबल डेकर में मात्र 200 यात्री सवार थे। जबकि एक डिब्बे में 128 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। डबल डेकर ट्रेन के कुल सात डिब्बे को मिलाकर 897 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि डबल डेकर पूरी तरह से एसी होने के कारण ट्रेन का किराया अधिक है। इसके साथ ही ट्रेन का समय भी ठीक नहीं है। जिसके कारण डेली पैसेंजर, सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले लोग भी डबल डेकर की अपेक्षा कोलफील्ड व ब्लैक डायमंड ट्रेन में ही सफर करना उचित समझते है। चार माह में तीन प्रयोग किए जाने के बाद भी यात्रियों का रुझान डबल डेकर के प्रति नहीं हो पाया है। धनबाद से हावड़ा के लिए सुबह कोलफील्ड एक्सप्रेस है, जबकि शाम को ब्लैक डायमंड। कोलफील्ड शाम में वापस आती है और ब्लैक डायमंड हावड़ा से सुबह खुलती है। डबल डेकर हावड़ा से सुबह साढ़े आठ बजे खुलती है। धनबाद से शाम साढ़े छह बजे हावड़ा के लिए खुलती है। इन दोनों ट्रेनों की समय सारणी डबल डेकर ट्रेन से मैच करती है। डबल डेकर में जनरल कोच नहीं होने से धनबाद, आसनसोल, रानीगंज, दुर्गापुर आदि क्षेत्रों के डेली पैसेंजर के लिए इसका किराया भी अधिक है। यात्रियों का कहना है कि बैठने के लिहाज से भी डबल डेकर की सीटें आरामदायक नहीं है। वही ब्लैक डायमंड और कोलफील्ड के चेयर कार की सीटें ज्यादा बेहतर है।हालांकि रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि पहले भी ट्रेन के संचालन में फेरबदल किया गया है यात्रियों के सुझाव पर आगे भी विचार किया जा सकता है। लेकिन नित्ययात्रियों के लिए दो मंजिला ट्रेन से दूर रहने  का सबसे बड़ा कारण वातानुकूलित (एसी) होने के कारण किराया ज्यादा होना है।


Thursday, February 16, 2012

ममता में सरकार चलाने का दम नहीं: राहुल


 प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा का कहना है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में परिवर्तन के बल पर सत्तारुढ़ हुई पार्टी में सरकार चलाने का दम ही नहीं है। गुरुवार को हावड़ा में हावड़ा जिला भाजपा की विशाल जनसभा को हावड़ा मैदान में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों ने बहुत आशा के साथ माकपा को सत्ता से हटाया था लेकिन बीते आठ महीने के दौरान ही इन्होंने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए।
उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षकों का सम्मान है ही नहीं नारी भी सुरक्षित नहीं है। लोगों को रोजगार दिलवाने के लिए ठोस कदम उठाए नहीं जा रहे। नवजात बच्चों की मौत की सरकार को जानकारी ही नहीं है। दीदी को मां का दर्द महसूस ही नहीं हो रहा है। किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं लेकिन ममता उन लोगों से मुंह मोड़ रही है। जबकि चुल्लू पीकर मरने वालों के लिए सरकार दो लाख रुपए सहायता राशि देने का एलान कर चुकी है।
भाजपा को मुसलमान विरोधी कहने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भले ही हमारा दल विधानसभा  में नहीं है लेकिन इसके बजाए सड़कों पर आम लोगों के साथ विरोधी दल की भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हावड़ा जिला अध्यक्ष अंबुज शर्मा ने की। युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष उमेश राय ने हाकर हटाए जाने का विरोध करते हुए आठवीं कक्षा तक पास-फेल प्रथा बंद किए जाने पर नाराजगी प्रकट की।