Sunday, June 30, 2019

आठ साल में ममता ने 150 मंदिरों के लिए खर्च किए 350 करोड़



ममता बनर्जी सरकार पर लंबे समय से मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया जाता रहा है। इस आरोप में मुख्य तौर से यह कहा जाता है कि हिंदुओं के मुकाबले वे मुसलमानों के धार्मिक स्थान की देखभाल, उनके धार्मिक कार्यक्रमों में ज्यादा शामिल होती हैं। विरोधी दलों की ओर से बार-बार यह आरोप लगाया जाता है कि मुस्लिम वोट बैंक पक्का करने के लिए वे  ऐसा कर रही हैं। खास तौर से बीते कुछ सालों से इस तरह के आरोप ज्यादा जोरशोर से लगाए जा रहे हैं। लेकिन आंकड़ों की  अगर बात करें तब पता यह चलता है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन के दौरान पिछले आठसालों में राज्य सरकार ने हिंदू मंदिरों की मरम्मत और तीर्थस्थानों के विकास के लिए करीब 350 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को शुरू किया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से छह करोड़ रुपए की रकम प्रदान की गई है। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के सूचना व संस्कृति विभाग ने खुद राज्य के विभिन्न विभागों से इस बारे में आंकड़े इकट्ठा किए हैं। राज्य विधानसभा के मौजूदा अधिवेशन में तृणमूल कांग्रेस के विधायक मानस मजूमदार के  एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री के विभाग ने लिखित तौर पर यह जानकारी दी है। हालांकि समय की कमी के कारण इस बारे में विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकी।
राज्य के सूचना व संस्कृति विभाग की ओर से विधानसभा में जानकारी दी गई है कि बंगाल के प्राचीन और एतिहासिक मंदिर व संलग्न तीर्थस्थानों की देखभाल व सामग्रिक ढांचागत विकास के लिए बीते कुछ सालों में खुद के बजट से कम से कम 157 परियोजनाएं अपने हाथों में ली हैं। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर खर्च 347 करोड़ 48 लाख रुपए होगा। इसमें सात परियोजनाओं के लिए बीते पांचसाल में केंद्र सरकार से 5 करोड़ 96 लाख रुपए मिले हैं। जलपाईगुड़ी के जलपेश व जटिलेश्वर मंदिर के विकास के लिए तेरहवें वित्त आयोग के अनुदान से यह रकम मिली है। इसके अलावा पूर्व मेदिनीपुर के डीही बाहिरी के जगन्नाथ मंदिर,पूर्व बर्दमान के मानकड़ के कई मंदिरों, बीरभूम के नानूर के शिव मंदिर, बांकुड़ा के कोतुलपुर के दामोदर मंदिर, हुगली जिले के गुड़प के नंददुलाल मंदिर और उस जिले के बाक्सा के 12 शिव मंदिरों के विकास के लिए केंद्र की रकम को खर्च किया गया है या खर्च के लिए शामिल किया गया है।
सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सात मंदिरों को छोड़ कर बाकी सभी 150 मंदिरों के विकास में सारा खर्च राज्य सरकार की ओर से किया जा रहा है। विभिन्न सरकारी महकमों, स्थानीय नगरपालिका और पंचायतों, जिला परिषद व विकास परिषदों के माध्यम से यह रकम खर्च की गई है या की जा रही है। कोलकाता के कालीघाट और दक्षिणेश्वर, हुगली के तारकेश्वर, गंगासागर के कपिलमुनि मंदिर, बीरभूम के तारापीठ और कंकालीतला और जलपाईगुड़ी के देवी चौधरानी जैसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिर  और तीर्थ स्थान इस सूची में शामिल हैं। 

Friday, December 14, 2018

पांच राज्यों में पराजय-भाजपा नेताओं में गर्मा -गर्म बयान देकर मीडिया में सुर्खियां बटोरनी की लगी होड़

पांच राज्यों में पराजय-भाजपा नेताओं में गर्मा -गर्म बयान देकर मीडिया में सुर्खियां बटोरनी की लगी होड़
रंजीत लुधियानवी
पांच राज्यों में चुनाव में पराजय के बाद भी बंगाल के भाजपा नेता एक के बाद एक गर्मा-गर्मा बयान देकर मीडिया में सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। कभी दिलीप घोष, लाकेट चटर्जी तो कभी केशरी की ओर से बयानबाजी जारी है। कोई पुलिस वालों की चमड़ी उधेड़ रहा है तो कोई सत्ता में आने के बाद एनकाउंटर करने की चेतावनी दे रहा है। हमेशा विवादास्पद बयान देकर चर्चा में रहने वाले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक बार फिर विवादास्पद  बयान देते हुए पुलिस वालों की वर्दी खुलवाकर पीठ का चमड़ा उधेड़ने की चेतावनी दी है। मेदिनीपुर जिले के केशियाड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम  पंचायत के बोर्ड गठन करने के दौरान गाड़ी उल्टा कर पीटा था। हमे भगाने वाले पुलिस वालों की वर्दी खुलवाकर पीठ का चमड़ा उधेड़ देंगे। तृणमूल नेता अगर समझते हैं कि हमें भगाएंगे, तब सूद और असल में सारा वसूल कर लेंगे।
मालूम हो कि पांच राज्यों में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन किया है। लोगों ने वोट देकर तीन राज्यों में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया है। ऐसे में लोगों में यह उत्सुकता थी कि देखें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जनसभा में नया क्या कहते हैं। लेकिन उन्होंने किसी तरह का राजनीतिक बयान देने के बजाए पहले की तरह भड़काने वाले बयान देकर ही लोगों की तालियां बटोरीं। अपने शब्दों में शिष्टाचार की सीमा लांघते हुए भाजपा नेता ने सत्तारूढ़ दल पर हल्ला बोलते हुए उसे (छागलेर तृतीय संतान)  बकरी की तीसरी संतान बताया। मालूम हो कि पंचायत चुनाव में यहां भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को पराजित करके पंचायत समिति पर कब्जा किया है। हाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलाके का दौरा किया था और यहां की देखरेख की जिम्मेवारी परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी को सौंपी है।
भाजपा नेता ने तृणमूल को ललकारते हुए कहा कि कांग्रेस में तोड़फोड़ की है, माकपा में तोड़फोड़ की है लेकिन अगर भाजपा में ऐसा करने की कोशिश की तो हम सरकार ही गिरा देंगे। कांग्रेस के बारे में घोष ने कहा कि बंगाल में कांग्रेस आईसीयू में चली गई है, इसलिए सत्ता दखल करने के लिए  खड़ा होने की क्षमता कांग्रेस में नहीं है।
भाजपा नेताओं में गर्मागर्म बयानबाजी करने में लगता है कि जैसे होड़ लगी हुई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से लेकर दूसरे नेता इस मामले में एक दूसरे को पछाड़ते हुए दिख रहे हैं। भाजपा की राजकुमारी केशरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि बंगाल में सत्ता में आने यहां योगी राज चालू हो जाएगा। बताया जाता है कि दो दिन पहले दुर्गापुर की एक जनसभा में उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल में सत्ता में आने पर यहां राज की तरह एनकाउंटर किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली से लेकर राज्य तक सभी स्तर के नेता सूची बनाने के लिए कह रहे हैं। भाजपा बंगाल में आ रही है। किसका-किसका एनकाउंटर करना है, यह हम देखेंगे।
मालूम हो कि केशरी ने पहली बार इस तरह का विवादास्पद बयान नहीं दिया है। पहले भी वे इस तरह के बयान देकर चर्चा में रह चुकी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ उन्होंने इस तरह का एक बयान दिया था। केशरी ने कहा था कि सत्ता में आने के बाद दीदी (ममता ) को कुत्ते की तरह दौड़ा-दौड़ा कर मारूंगी। मुख्यमंत्री की ओर से राज्य के लिए आर्थिक मदद हासिल करने के लिए केंद्र में जाने के बारे में टिप्पणी करते हुए इस साल ममता के खिलाफ उन्होंने कहा था कि दीदी मोदी बाबा के पास भीख मांगने के लिए दिल्ली जाती है।
मालूम हो कि केशरी ही नहीं भाजपा के एक के बाद दूसरे नेता इस तरह के विवादास्पद बयान देकर मीडिया की सूर्खियों में छाए रहने के माहिर हो गए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के अलावा महिला मोर्चा की नेत्री लाकेट चटर्जी भी इस मामले में किसी से पीछे नहीं है। रथ यात्रा के खिलाफ बोलने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा था कि रथ यात्राके सामने आने वाले कूचले जाएंगे। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी इसके जवाब में करारे जवाब दिए जा रहे हैं। हालांकि राज्य के साहित्य और समाज से जुड़े  लोगों का कहना है कि बंगाल की सभ्यता और संस्कृति ऐसी बयानबाजी दुनिया के सामने खराब होती है। नेताओं को अपनी गरिमा  और राज्य के गौरव को सोच कर ही कुछ बोलना चाहिए।


Saturday, June 2, 2018

ममता,लालू,केजरीवाल, अखिलेश, मायावती,तेजस्वी मोदी से बेहतर हैं

देश प्रेमी भारतीय नागरिकों से अपील   पर प्रतिक्रियाओं का जवाब 
ममता,लालू,केजरीवाल, अखिलेश, मायावती,तेजस्वी मोदी से बेहतर हैं
फेसबुक, ट्विटर, गुगल प्लस, वाट्सएप, ब्लाग,लिंकदिन  समेत विभिन्न सोशल मीडिया पर अपील का व्यापक असर हुअा और करीब एक लाख लोगों ने पढ़ा। इतना ही नहीं हजार के करीब लोगों ने प्रतिक्रिया भी प्रकट की। 'मोदी बनाम विपक्ष' विषय पर ज्यादातर मोदी समर्थक चमचे,दलाल,गद्दार (जिसे भगत कहा जाता है) नहीं थे बल्कि 'भ्रम' का शिकार हुए देश प्रेमी नागरिक ही थे। इससे लगता है कि वास्तव में मोदी के चमचों की संख्या 'एक फीसद' भी नहीं है। 
'भ्रम' के बारे में बंगाल के लोगों को मालूम है क्योंकि जादूगर पीसी सरकार तीन घंटे के मायाजाल में एक एेसी दुनिया की रचना करते थे कि लोग सब कुछ भूल जाते थे। दरअसल इसे वह 'काल्पनिक जगत' कह सकते हैं जिसमें लोगों को भरपूर मनोरंजन मिले लेकिन हासिल कुछ नहीं हो। सरकार का मोदी से भ्रम तब टूटा जब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ जीत की चाह में शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। मोदी का जादू या उनका खुद का मायाजाल उन्हें जीत नहीं दिला सका। अजय देवगन अभीनित  दृष्यम  फिल्म देखने वालों को यह बाते अासानी से समझ में अा जाएंगी। 
मोदी समर्थकों के पास अंतिम समय में अब एक ही सवाल बचा है कि क्या मोदी से विपक्ष के नेता बेहतर हैं तो इसका सीधा सा जवाब है कि हां, सौ फीसद बेहतर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, मायावती, लालू प्रसाद यादव, चंद्रबाबू नायडू, मुलायम सिंह यादव, शरद पवार, शरद यादव कहीं बेहतर हैं। तेजस्वी ने लगातार तीसरी जीत हासिल करके बता दिया है कि वह भी मोदी से बेहतर नेता है।  जरुर चौंक जाएंगे लेकिन सच्चाई यही है। विपक्ष के नेता 'जननेता' और मोदी महज एक 'ब्रांड' है। 
मायावती ने 165 किलोमीटर के 'ताज एक्सप्रेस' और अखिलेश यादव ने 302 किलोमीटर 'लखनऊ एक्सप्रेस वे' का उद्घाटन किया तो यूपी के लोगों को भी पता नहीं चला और मोदी ने 9 किलोमीटर की एक सड़क का उद्घाटन किया तो खुली जीप पर एेसा प्रदर्शन किया देश-दुनिया में लगा कि मोदी ने वास्तव में कमाल कर दिया है। यह 'भ्रम जाल' मीडीया की बदौलत बनाया गया है, जो लोगों के सामने औंधे मूंह गिर रहा है। नीम की दातून से अच्छी कोलगेट, कोलगेट के अच्छा पतंजलि पेस्ट महज कुछ लाख खर्च करके कंपनियों ने लोगों के दिमाग में घुसा दिया है। तब महज चार साल में चार हजार करोड़ रुपए विज्ञापन, ब्रांड में खर्च करके बनाया गया भ्रमजाल क्या बड़ी बात है। 
अगर 'ममता-मोदी' का मुकाबला किया जाए तो मोदी को 'शून्य' भी नहीं मिलेंगे। बीस साल तक जड़ और गंदगी के बारे में बदनाम राज्य की जड़ता तोड़ कर सफाई के मामले मेंं दूसरे राज्यों के मुकाबले खड़ा करना ममता की बहुत बड़ी उपलब्धि है। 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के विज्ञापन पर हजारों करोड़ खर्च किए गए लेकिन परियोजना में महज सौ करोड़ रुपए भी प्रति राज्य के लिए नहीं रखे गए। जबकि दूसरी ओर ममता की 'कन्याश्री' परियोजना में 2000 करोड़ की राशि खर्च करके  40 लाख बेटियोें को बचाया, पढ़ाया गया,युनेस्को, देश-विदेश के साथ ही केंद्र सरकार ने भी प्रशंसा की, लेकिन देश के लोगों कोे पता ही नहीं चला। सात साल के शासन के दौरान 'माओवाद-नक्लवाद' को जड़ से समाप्त करने का ममता ने बेमिशाल कारनामा किया, केंद्र ने बंगाल के माओवादी प्रभावित जिलों को 'रेड कारीडोर' से बाहर करने के साथ ही अातंकवाद प्रभावित  जिलों में दी जाने वाली अार्थिक मदद मई महीने से बंद कर दी है। ममता का यह काम मोदी के चार हजार करोड़ के विज्ञापन से ज्यादा बड़ा है, लेकिन कहीं प्रचारित नहीं हुआ। भाजपा दार्जिलिंग में गोरखा आतंकियों को भड़का कर 10 साल से लोकसभा सीट जीतती रही है, ममता ने वहां भी हालात बदल कर दिखा दिए। अब वहां अातंकी और भाजपाई हवा हैं। 
बंगाल में 2007-2008 से भाजपा पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। दावा किया जा रहा है कि नंबर दो पर है। 294 विधानसभा सीटों में 3, 42 लोकसभा सीटों में अलगाववादी गोरखा मोरचा की मदद से मिलकर दो सीटें, पंचायत में तृणमूल की 300 के मुकाबले कहीं तीन और कहीं तेरह के साथ भ्रम पैदा किया जा रहा है कि पता नहीं क्या कमाल कर दिया। 
वजह सिर्फ एक है कि बंगाल की 'शेरनी' से 'दीदी' और अब 'जननेत्री' बनी ममता बनर्जी ने 'मां-माटी-मानुष' की सरकार के माध्यम तक नागरिक सेवाओं को जनजन तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। राज्य के नौ-दस करोड़ लोगों में शायद ही कोई एेसा घर हो जहां उनकी ममतामय पहुंच नहीं हो। स्कूल में दाखिला,किताबें, जूते, बैग, दोपहर का भोजन से लेकर सारी शिक्षा व्यवस्था फ्री, 40 लाख छात्र-छात्राओं को साइकिल वितरित करके स्कूल जाने की परिवहन समस्या का समाधान, स्कूल-क्लब को लाखों की मदद करके भवन और शिक्षा के साथ खेलकूद में बंगाल को अागे लेकर जाने, बंगाल में प्याज की खेती से लेकर फुटबाल का निर्माण करने से लेकर हर तबके के लोगों को सरकारी सुविधाएं प्रदान की हैं। 
ब्रांड और जननेताओं में फर्क यह होता है कि ब्रांड का विज्ञापन बंद होते ही लोग नए ब्रांड की ओर चले जाते हैं। रामदेव किताबें छापते थे, सलवार-सूट पहन कर भागने के बाद सारा प्रकाशन बंद हो गया। लोगों को याद भी नहीं कि कुछ छापते थे। 
लालू प्रसाद यादव गरीबों के 'मसीहा' हैं। उन्होंने बिहार के गरीब और पिछड़े लोगों को अार्थिक-सामाजिक तौर पर इस मुकाम तक पहुंचाया है कि भाजपा के अभी तक वहां पसीने छूट रहे हैं। काशीराम-मायावती ने अपने समाज के लोगों के लिए जितान किया है कि हजारों करोड़ खर्च करने के बाद भी साहब 'दहशत' में हैं। मुलायम सिंह यादव ने समाज के  लिए जो किया, अखिलेश ने उसे' हाईटेक' तरीके से अागे बढ़ाया और उत्तर प्रदेश को सफल राज्यों की कतार में शामिल करवाया। अरविंद केजरीवाल बगैर पुलिस-प्रशासन, लगभग क्षमताहीन होकर भी स्कूल, अस्पताल , बिजली पानी से लेकर आम लोगों के लिए कितना काम कर रहे हैं इसकी 'मिसाल' मिलना मुश्किल है। नायडू ने अपने राज्य में जो किया है, उस बारे में इलाके के लोगों को मालूम है। 
बंगाल का रिकार्ड रहा है कि पंचायत चुनाव में जीतने वाला दल अगले पांच साल तक लोकसभा,विधानसभा पर अासानी से जीत जाता है। भाजपा की ओर से रामनवमी से लेकर हनुमान जयंती तक दंगा-फसाद, चुनाव को लेकर व्यापक हंगामा किया गया, लेकिन ममता ने अपना रिकार्ड बरकरार रखा कि सत्ता में अाने के बाद पंचायत और उपचुनाव में मुख्यमंत्री प्रचार नहीं करेंगी। अगर वे प्रधानमंत्री बन गई तब हो सकता है कि बंगाल में होने वाले चुनाव में भी प्रचार बंद कर दें। यह लोगों में 'भरोसे' और अपने काम कोे लेकर है, जिसने उन्हें जननेत्री बनाया है। 
दूसरी ओर, गुजरात का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बन गया उसे तो अासानी से जीत जाना चाहिए थे, लेकिन लाव-लश्कर के बाद भी मुश्किल से जीत मिली। विपक्ष की दहशत इतनी कि यूपी के एक उपचुनाव की पराजय से डरकर चुनाव प्रचार बंद होने के बाद इलाके से कुछ दूरी पर रोड शो करने पहुंच गए। इसके बाद भी भाजपा उम्मीदवार बुरी तरह से पिट गया। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री की सीट पर हार के बाद यूपी में किसी मुसलमान को सांसद बनने से रोकने में नाकाम रहना मोदी के गाल पर जबरदस्त तमाचा है, जिसे जाटों, ब्राहम्णों, हिंदुओं ने मिल कर जड़ा है। 
यह फर्क है ब्रांड और जननेताओं में । 
विज्ञापन के बल पर ब्रांड को लोगों तक पहुंचाने के लिए झूठी बातें की जाती हैं,इस बारे में समझदार लोगों को तो मालूम है। नामसझ होग झांसे में फंस कर बेवकूफ बन जाते हैं। मोदी 'मूरख' नहीं है लेकिन 'यू टर्न' के मामले में मोहम्मद  बिन तुगलक को हार मनाने वाले पहले अाधार का विरोध करते थे, पाकिस्तान-चीन, एफडीअाई, जीेएसटी का विरोध करते थे। अब उनका 'गुणगान' कर रहे हैं। कर्नाटक चुनाव में 1957 में जनरल बने अधिकारी का 1948 में नेहरू से अपमान करने की बात हो या 1938 की जिन्ना की तस्वीर का 2018 में हल्ला करने साफ है कि 'ब्रांड' का लोगों पर असर नहीं रहा। 
मोदी नेता 'नहीं' ब्रांड हैं और' झूठ' बोल कर लोगों को 'भ्रमित' किया जा रहा है। हर रैली में 70 साल कांग्रेस ने क्या किया कहने वाले को यह मालूम नहीं कि इसमें 16 साल तो उनकी सरकार थी। यह मानने लायक नहीं है। देश में 1947-1952 तक सरकार में श्यामाप्रसाद, अंबेडकर शाामिल थे। कांग्रेस का पहला मंत्रिमंडल 1952 में बना और 1957-1964 में नेहरू प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद भाजपा के प्रिय शास्त्री जी रहे। 1977 से 1979 तक जनता पार्टी की सरकार , 1989 में वीपी सिंह की सरकार, 1998 में वाजपेयी की सरकार, 2014 में मोदी की सरकार के दौरान चंद्रशेखर, गुजराल प्रधानमंत्री रहे। क्या गुजरात के मुख्यमत्री को देश के बारे में मालूम नहीं कि 16 साल श्यामाप्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण अाडवाणी, शास्त्री, मोदी सरकार में रहे। 
ग्रामीण बिजली परियोजना 2005 से शुरू हुई थी और 31 अक्तूबर 2013 तक सरकारी अांकड़ों के मुतािबक 93.99 फीसद घरों में बिजली पहुंच चुकी थी। इससे मोदी के घर-घर बिजली पहुंचाने के दावे की पोल खुल जाती है। टैक्स देने वाले 2016-17 में 6.41 करोड़ लोग थे, इसमें 6.08 करोड़ व्यक्तिगत कर दाता था। कहां वे करदाताओं की संख्या बढ़ा सके।
एक भ्रम यह फैलाया जाता है कि मोदी के आने के बाद विरोधी दल नेता मंदिरों में जाने लगे, हिंदु धर्म को महत्व देने लगे, जो कि सरासर झूठ है। मोदी के बारे में लोगों को गुजरात नरसंहार के बाद पता चला कि इस नाम का  भी कोई नेता है. लेकिन ममता उनके पहले प्रसिद्ध हो चुकी थी। अगर ममता की बात की जाए, बचपन से उनके घर में मां काली की पूजा होती है, वे अपने मां के साथ सपरिवार खुद पूजा करती हैं। बीते 30 सालों से तो मीडिया में रहते हम लोगों ने भी देखा है कि काली पूजा के साथ ही सबसे ज्यादा दुर्गापूजा पंडालों में जाना, उद्घाटन के लिए अामंत्रित किए जाने वालों में सबसे पहले ममता ही रहती हैं। सरकार में अाने के बाद गंगा सागर के लिए बीते साल 70 करोड़ रुपए खर्च करने हों या छठ पूजा की छुट्टी उनके कार्यकाल में ही शुरू हुई है। मुख्यमंत्री बनने से पहले ही वे गुरूपर्ब के मौके पर गुरूद्वारों में जाती रही हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद बड़ा दिन समारोह को एक इवेंट बना दिया वहीं चार दिन की दुगार्पूजा को 10 दिन का त्योहार बनाने के साथ ही दुर्गापूजा विसर्जन का कार्निवल के अाइडिए से विश्व में बंगाल को नई पहचान प्रदान की है। 
विज्ञापन ने ब्रांड के तौर पर बताया कि देश को 'गुजरात माडल' बनाया जाएगा, अब लोगों को पता चल रहा है कि 
गुजरात माडल के तहत स्कूल के बच्चों को साइकिल में 'पंचर' लगाना सिखाया जाएगा। मोदी 'पकौड़े' बेचने की सलाह दे रहे हैं। इससे साफ है कि विपक्ष के नेता मोदी से 'बेहतर' हैं। 
घोटालों की अगर बात की जाए, तब 71 साल में जितने घोटाले हुए होंगे,सारे मिलाकर कर भी नोटबंदी, राफेल डील से कम ही होंगे। इसके अलावा नीरव, ललित, सुशील मोदी के हजारों करोड़ डकार कर भागने,अमित शाह की संपति में 300 गुणा वृद्धि , उनके बेटे की संपति में भारी वृद्धि, भाजपा कार्यालय में करोड़ों रुपए खर्च समेत चुनाव प्रचार में खर्च की गई राशि घोटालों के अलावा कहां से अाई है।बैंक डिफाल्टरों को लाखों करोड़ का कर्ज माफ क्या घोटाला नहीं है। बैंक वालों की ओर से डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार की खामोशी क्या बतलाती है। 
एक बात और लोगों के दिमाग में ठूंसी जा रही है कि 70 साल कांग्रेस ने क्या किया, तब आप लोगों ने विरोध क्यों नहीं किया। अारटीअाइ ने बताया है कि मोदी ने चार साल में विज्ञापन पर 4000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। लेकिन सरकार के अलावा भाजपा, उनके समर्थकों की ओर से मोदी को ब्रांड बनाने के लिए कितने अरब करोड़ रुपए खर्च किए गए, इसका कहीं हिसाब नहीं मिल सकता। 
कोबरा पोस्ट के 'स्ट्रींग अापरेशन' ने मीडिया की पोल खोल दी है कि कैसे पैसे ले लेकर क्या कुछ छापा, दिखाया जाता है। कांग्रेस की गलतियों का देश के लोगों ने सबक सिखाया मोदी को तो मालूम नहीं क्योंकि बेचारे गुजतार में पड़े रहते थे। लेकिन बंगलादेश बनाने के बाद इंदिरा गांधी को 'मां दुर्गा' बताने वाले अटल बिहारी बाजपेयी की इसी देवी को लोगों ने इमरजंसी के खिलाफ 1977 में धराशायी कर दिया था। इंदिरा की मौत के बाद प्रचंड बहुमत से सत्ता में अाने वाले राजीव गांधी को भी हमने 5 साल बाद उनकी 'औकात' बता दी थी। 
अाधार कार्ड के बहाने लोगों को परेशान करने, तेल की कीमतों में वृद्दि, लोगों की परवाह नहीं करने के कारण ममता, सीपीऐम न यूपीए सरकार से नाता तोड़ा था। इसलिए 10 साल बाद देश की जनता ने मनमोहन सिंह को 'सबक' सिखाते हुए 'ब्रांड' को सत्ता सौंप दी। 
इसलिए 70 सालों में 16 से ज्यादा साल भाजपा और दूसरे दलों ने राज किया। लोग 'खामोश' नहीं थे, इमरजंसी के दौरान भी नहीं और अब पहले से ज्यादा इमरजंसी है तब भी खामोश नहीं है।  बसु बाजपेयी की भाजपा को 'असभ्य, बर्बर' कहते थे, लेकिन मोदी ने उसे दंगाई और देशद्रोही भी बना दिया। इसलिए बंगाल में ममता, दिल्ली में केजरीवाल, बिहार में तेजस्वी, यूपी में अखिलेश-मायावती, पंजाब में अमरेंद्र सिंह का विरोध करने का मतलब मोदी का समर्थन करना ही होगा। 
कांग्रेस का भी कोई विकल्प नहीं था, मोदी को मनमोहन के मुकाबले खास तौर पर महंगाई कम करने, लोगों के बैंक खातों में 15 लाख रुपए देने और जन समर्खक काम करने के लिए चुना गया था। लेकिन चार साल में 300 फीसद डीजल पर टैक्स बढ़ाकर, मोदी जमाने में ही किरासन की कीमत में 69 फीसद वृद्धि करने का नतीजा है कि देश भर में किसान, छात्र, बैंक कर्मचारी से लेकर हर अादमी त्रस्त है। हाल में 11 राज्यों की 15 सीटों पर करीब एक करोड़ लोगों ने मतदान करके बता दिया है कि भ्रम की दीवार टूट चुकी है और बंगला में कहते हैं उनीसे -फिनिश। 
देश के सामने सवाल यह है कि एक ब्रांड का समर्थन करना है, जिसकी कोई औकात नहीं है, जिसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है, जिसके अपने विचार नहीं हैं, जिनका कोई जनाधार नहीं है। जो सिर्फ वह कहता है जो उससे कहलवाया जाता है। इसके अाधार पर एक तानाशाह का चेहरा अख्तियार करके जनता को कुचला जा रहा है। दूसरी ओर, जननेता हैं जो देश, समाज, लोगों के लिए काम कर रहे हैं। 
सवाल यह है कि 'असभ्य, बर्बर, दंगाई, देशद्रोही पार्टी' को चुनना है या हमारे अपने लोगों को चुनना है, जो हमारे लिए काम करते है। पूर्ण बहुमत वाली सरकार अच्छी या मिली जुली, तो लोगों ने मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में होते देख लिया है। हिटलर की तानाशाह सरकार  से अच्छी जनता की सरकार होती है, इसमें शक नहीं है। हाल के उपचुनाव में लोगों ने बता दिया कि 2019 में भले ही कोई हो लेकिन मोदी प्रधानमंत्री नहीं होंगे। 
जयहिंद, जय भारत। 
रंजीत लुधियानवी 
3 जून 2018

Tuesday, May 29, 2018

देश प्रेमी भारतीय नागरिकों से अपील

देश प्रेमी भारतीय नागरिकों से अपील 
सोनिया , राहुल, ममता, केजरीवाल येचुरी, नायडू, अखिलेश, मायावती, लालू समेत इकट्ठा होने वाले राजनीतिक दलों के साथ 90 फीसदी जनता है, जिससे मोदी को दहशत है। एक चाय वाला झूठा, मक्कार, बेईमान, फेकू हो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि देश के 125 करोड़ लोगों को बाबा साहिब के संविधान ने बोलने की आजादी दे रखी है। लेकिन प्रधानमंदी का पद, 125 करोड़ लोगों की गरिमा से जुड़ा है। 
पाकिस्तान से एक के बदले 10 सिर लाने वाला 10 लाख ट्रन मीट्रिक चीनी खरीद रहा है, सबसे ज्यादा बीफ का कारोबार कर रहा है, 50  दिन के भीतर कालाधन,अातंकवाद, भ्रष्चाटार ,चीन को सबस सिखाने, माओवाद समाप्त करके महंगाई,तेल की कीमतें कम करने, लोगों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए जमा करने  का दावा करने वाला 1500 दिन बाद अपने 20 दलों में शिवसेना, अकाली, पीडीपी, नीतीश ही नहीं यशवंत सिन्हा, अडवाणी, शत्रुध्न सिन्हा जैसे भाजपाईयों की भी सुनने पर मजबूर है तो क्यूं 
ईटली का चश्मा, अमेरिका की घड़ी, 10 लाख रुपए का सूट, एक लाख 30 हजार की कलम लेकर चलने वाला अगर खुद को स्वदेशी, फकीर  कहे तो किसे शर्म अानी चाहिए। चीन का विरोध करके मोबाइल बाजार पर चीन को नियंत्रण सौंपने वाले को क्या करेंगेय़ 
अदानी की संपपित 66 फीसद, अंबानी की 67 फीसद, रामदेव की 173 फीसद, अमित शाह की 300 फीसद, जय शाह की 16000 फीसद बढ़ी, पेट्रोलियम बिजनेस बढ़ने से रिलायंस को 9543 करोड़ का रिकार्डज मुनाफा दूसरी ओर गरीबों के जनधन खाते खुलवा कर एसबीअाइ ने 388 करोड़ से ज्यादा उगाहे। 399 रुपए में फोन-काल-नेट फ्री लेकिन सांसदों को 1500 रुपए टेलीफोन बिल, वेतन में हजारों गुणा वृद्धि, कलकत्ता में पुल गिरता है तो मुख्यमंत्री जिम्मेवार बनारस में नितिन गडकरी का बेटा सारंग ठेकेदार पुल गिरता है तो चुप्पी। अाम लोगों को सबसिडी-सबसिडी का अलाप लगाने वाले मोदी ने अमीर कारपोरेट की 2.72 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर दिया लेकिन लगातार 14 दिन तक तेल की कीमतें बढ़ने के बाद भी मोदी सरकार गूंगी है क्या यह गुड गवर्नेंस है। बीते पांच साल में एक लाख करोड़ का बंक घोटाला हुअा लेकिन कुछ हुअा क्या.
अाइटीअाई, इंजीनियरिंग पढ़ कर हमारे बच्चे पंचर लगाएं, पकौड़े बेचें और ये साहिबान गुलछर्रे उड़ाएं.2014 में 29 फीसद लोगों  ने मोदी को वोट क्या इसलिए दिया था कि मुसलमान क्या खाएं, क्या पहने, क्या बोलें, क्या नहीं बोलें, मुगलसराए, इलाहाबाद का नाम बदल दें या महंगाई, भ्रष्टाचार, विकास , 15 लाख रुपए के लिए दिया था.
असभ्य,. बर्बर राजनीतिक दल को दंगाई, देशद्रोही बनाने वाले एक व्यकित के फैसले के कारण 200 से ज्यादा लोगों की जान गई क्या अपनी सनक के कारण लोगों की जानलेने वाले को अफसोस हुअा। उन लोगों के परिवार वालों को धेला भी दिया। 
इतिहास मोहम्मद बिन तुगलक का मजाक उड़ाता है क्योंकि उसने राजघानी दिल्ली से दौलताबाद कर दी थी. मोदी ने नोटबंदी का फैसला लेने के बाद सैकड़ों लोगों की जान ली, अारबीअाइ ने इतने सर्कुलर जारी किए जितने देश अाजाद होने के बाद भी नहीं हुए थे तो यह क्या तुगलक से कम है. किसान अात्महत्या कर रहे हैं, बैंक वालों की हालत खराब है, जीएसटी बगैर सोचे समझे लागू करने के कारण लाखों बेरोजगार हो गए हैें, गरीबी , महंगाई, बेरोजगारी की हालत खराब है. 
साहब दहशत में हैं. गुजरात में जीत के लिए चुनाव अायोग से मतदान की तारीखों का एलान रुकवाकर, लोकसभा का कामकाज रोक कर, संविधान की धज्जियां उड़ाई लेकिन सारे मंत्रीमंडल , देश के नोटों को स्वाह करने के बाद भी मोदी की किरकिरी से नहीं बच सका। यूपी में उपचुनाव में पराजय की दहशत से एक प्रधानमंत्री प्रचार करता है, कानून की धज्जियां उड़ाता है। यह दहशत है कि विरोधी दल के साथ 90 फीसद भारतीय हैं। 
दंगा, फसाद, हिंसा, गरीबी, महंगाई, झूठ, फरेबी, मक्कारी, भ्रष्टार को बढ़ावा देना है तो 2019 में मोदी को वोट करें। मोदी को मालूम हो कि दोबारा सत्ता में नहीं अा सकेगा, इसलिए साहब दहशत में हैं। 
एक बच्ची का बलात्कार हो, बलात्कारी का समर्थन करने वाला भाजपा का विधायक हो, दल के लोग रैली, जुलूस निकालें क्यां कभी यह भारत के इतिहास में पहले कभी हुअा था। एक जिंदा इंसान को मार कर जला दिया जाए, लोग समर्थन करें क्या कभी हुअा था। एक दल का प्रमुख खुलेअाम कहे कि हमें मौका दो हम विधायक खरीद कर दिखा देंगे क्या यह गद्दारी, देशद्रोह नही है। 
हम लोगों ने बचपन से पढ़ा है कि भारत विविधता में एकता वाला देश है, देखा है, समझा है लेकिन क्या यह दंगाई बीते सालों में जो कर रहे हैं वह भारत है। कर्नाटक ने संदेश दिया है कि हमारे खून-पसीने के 4000 (चार हजार करोड़) रुपए सिर्फ ब्रांडिंग में खर्च करने के बाद भले ही मोदी ने भाजपा को खत्म करके मोदी बना दिया हो। लेकिन देश के लोगों को सच्चाई मालूम है। देश के ज्यादातर अखबार, टीवी चैनल खरीदने के बाद भी दहशत का अालम यह है कि रातों की नींद उड़ी हुई है। चार हजार करोड़ से बनाया गया भ्रम जाल टूट चुका है, 2014 में भाजपा 6 राज्यों में थी, अब 10 राज्यों में है।सिक्कम, मिजोरम, तामिलनाडू, पांडी चेरी में 00, बंगाल, दिल्ली, पंजाब में 3-3 सीटें ही मोदी की औकात बताने के लिए काफी हैं। 
इसलिए देश प्रेमी नागरिकों से निवेदन है कि कम से कम 5 साल तक मोदी के नाम पर तो भाजपा को वोट मत दें। अगर इनती अकल ठिकाने अाती है और समझ अाता है कि देश के लोग मूर्ख, बेवकूफ नहीं है तो बाद की बाद में सोचेंगे। फिलहाल नो वोट फार असभ्य,बर्बर, दंगाई, देशद्रोही पार्टी.
जयहिंद, जय भारत। 
रंजीत लुधियानवी 
28 मई 2018 

Sunday, September 17, 2017

सबसे बड़ा सवाल क्या यह सरकार हिंदुयों की है?

किसी ने ये तथ्य FACEBOOK PAR POST KIYA  है। इसमें कितनी सच्चाई है, ये मुझे पता नहीं है। आपलोग स्वयं तथ्यों की सच्चाई का पता लगा कर विचार करें!
BJP का असली सच...
B - ब्राह्मण
J - जनता
P - पार्टी
आपको भी शर्म आ जाये, ना शर्म आए तो समझो आप एक जाति के गुलाम हो चुके हो।
1 मोहन भागवत (ब्राह्मण) - आरएसएस प्रमुख
2 नितिन गडकरी (ब्राह्मण) - पर्यटन मंत्री
3 सुषमा स्वराज (ब्राह्मण) - विदेश मंत्री
4 अरुण जेटली (ब्राह्मण) - वित्त मंत्री
5 प्रकाश जावडेकर (ब्राह्मण) - शिक्षा मंत्री
6 रविशंकर प्रसाद (ब्रहाण) - सुचना मंत्री
7 सुरेश प्रभु (ब्राह्मण) - रेलमंत्री
8 स्मृति ईरानी (ब्राह्मण) - कपड़ा मंत्री
9 मनोहर पर्रिकर (ब्राह्मण) - रक्षा मंत्री
10 कलराज मिश्र (ब्राह्मण) - मंत्री भारत सरकार
11 मनोज तिवारी (ब्राह्मण) - प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली
12 सुधांशु त्रिवेदी (ब्राह्मण) - राष्ट्रीय प्रवक्ता
13 संबित पात्रा (ब्राह्मण) - राष्ट्रीय प्रवक्ता
14 श्रीकांत शर्मा (ब्राह्मण) - राष्ट्रीय प्रवक्ता
15 किशोर उपाध्याय (ब्राह्मण) - राष्ट्रीय प्रवक्ता
16 रघुवर दास (ब्राह्मण) - झारखंड सीएम
17 देवेन्द्र फड़नवीस (ब्राह्मण) - महाराष्ट्र
18 किरण रिज्जू (ब्राह्मण) - राज्य मंत्री
19 नृपेन्द्र मिश्र (ब्राह्मण) - मुख्य सचिव पीएम
20 मुकुल रोहतगी (ब्राह्मण ) - अटार्नी जनरल
21 मेनका गाँधी (ब्राह्मण) - राज्य मंत्री
22 डाॅ महेश शर्मा (ब्राह्मण) - राज्य मंत्री
23 बाबुल सुप्रियो (ब्राह्मण) - राज्य मंत्री
24 विपिन रावत (ब्राह्मण) - थल सेना प्रमुख
अब देश के ब्राह्मण के घर जब बच्चा पैदा होगा तो डाक्टर कहेगा ''बधाई हो कैबिनेट मंत्री हुआ है''
देश मे से चुने गए 44 जजो में 34 "ब्राह्मण" है। ओर भारतीय मीडिया का तो कहना ही क्या, ये तो स्पष्टरुप से ब्राह्मणवादी है क्योंकि इसमें 80% "ब्राह्मण" ही भरे पडे है।
केंद्र की BJP(ब्राह्मण जनता पार्टी) सरकार द्वारा दिये गये पद्म-भूषण, पद्म-विभूषण ओर भारत रत्न सम्मान - 2016 -17
1.रजत शर्मा (ब्राह्मण)
2.अनुपम खेर (ब्राह्मण)
3.उदित नारायण (ब्राह्मण)
4. सुधीन्दर मेमन (ब्राह्मण)
5. श्री रविशंकर प्रसाद (ब्रहाण)
6. यामिनी कृष्ण मूर्ति (ब्राह्मण)
7. अविनीश दिक्षित (ब्राह्मण)
8. विश्वनाथन शांता (ब्राह्मण)
9. अश्विनी तिवारी (ब्राह्मण)
10. Bhikhudan GadhvSupakar(ब्राह्मण)
11. Prathibha Prahlad (ब्राह्मण)
13. Tulsidas Borkar (ब्राह्मण)
14. Soma Ghosh (ब्राह्मण)
15. Nila Madhab Panda (ब्राह्मण)
16. S.S. Rajamouli (ब्राह्मण)
17. Madhur Bhandarkar (ब्राह्मण)
यक्ष प्रश्न ???
क्या देश में अब ब्राह्मण ही बचे हैं, जो सम्मान के योग्य हैं !!! ब्राह्मण की आबादी भारत मे 3% है, मगर इन्होने 97% गैरब्राह्मण को अपना मानसिक गुलाम बनाकर रखा है।
अब की बार "सबका साथ सिर्फ ब्राह्मण का विकास" वाली सरकार।

Wednesday, August 23, 2017

देश बचाने के लिए एकजुट होने की जरुरत:कन्हैया

देश बचाने के लिए एकजुट होने की जरुरत:कन्हैया




कोलकाता, 23 अगस्त  
जेएनयु नेता कन्हैया कुमार ने आज प्रधानमंत्री की ओर से मन की बात करने से लेकर देश में एक समुदाय के खिलाफ दुष्प्रचार करके देश की एकता और अखंडता को भंग करने के साथ ही पश्चिम बंगाल में बाढ़ के मुद्दे पर केंद्र और उनके सहयोगी दलों की चुप्पी, सैनिकों की ओर से की जा रही आत्महत्या समेत अनेक मुद्दों को उठाते हुए कहा कि लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने के लिए तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, लेकिन लोगों को चाहिए कि अगर देश को बचाना है तो वे एकजुट हो जाएं। आल इंडिया यूथ फेडरेशन (एआइवाइएफ) और आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइइएसएफ) की ओर से देश व्यापी 60 दिवसीय लांग मार्च के दौरान उत्तर चौबीस जिले के डनलप में भगत सिंह चौक पर उनका भव्य स्वागत किया गया। करीब तय समय से ढाई घंटे देरी से पहुंचे छात्र नेता को सुनने के लिए भारी संख्या में सुबहसे ही लोग मौजूद थे। लोगों की इतनी भीड़ थी कि श्यामबाजार से लेकर बैरकपुर तक ट्रैफिक सेवा अस्त-व्यस्त हो गई। 
उन्होंने विरोधियों से कहा कि मेरा मुंह काला करने या विरोध करने की स्वतंत्रता इसलिए है कि देश में लोकतंत्र कायम है, लेकिन इससे लोगों का ध्यान भटकाने की कवायद ठीक नहीं है। देश में गरीबी, भूखमरी,बेरोजगारी, आतंकवाद समेत कई समस्याएं हैं। भाजपा नेता एक लड़की को छेड़ता है, दो समुदाय के लोगों का मेलमिलाप देख कर ऐसे लोगों को दिक्कत होती है क्योंकि उनकी राजनीति जमती नहीं है। बंगाल में धर्म के नाम पर लोगों में फूट डाली जा रही है, जबकि बांग्लादेश नामक देश का गठन धर्म के आधार पर नहीं भाषा के आधार पर हुआ था। कम्युनिस्टों के शासन में किसानों पर गोली चलने की घटना को गलत मानते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, इसके लिए हम माफी मांगते हैं। लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ए क समुदाय के लोगों को निशाना बना रही है। एक समुदाय को डराया, धमकाया जा रहा है। लोगों को सवाल पूछने चाहिए, लड़ना चाहिए। ऐसा करने पर कई तरह से परेशान किया जा सकता है, लेकिन इसके घबड़ाने की बजाए एकजुट होने की जरुरत है। 
उन्होंने कहा कि कोलकाता में एक पत्रकार ने पूछा कि आप तृणमूल कांग्रेस के विरोध में क्यों नहीं बोलते? मैने उनसे सवाल किया कि क्या वजह है कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बोला जाए? उनका कहना था कि बंगाल में मार्क्सवादियों के साथ तृणमूल का विरोध है,इसलिए माकपा को बचाने के लिए तृणमूल का विरोध करना चाहिए। ऐसे लोगों से मेरा कहना है कि मैं मार्च के जरिए माकपा को बचाने के लिए नहीं, देश बचानेके लिए निकला हूं। माकपा का आजादी के आंदोलन में अपना इतिहास रहा है, देश में अगर जमहूरियत कायम रहेगी, राजनीतिक दल भी बचे रहेंगे। 
उन्होंने कहा कि देश से प्यार करने का मतलब देश के लोगों से प्यार करना है। लेकिन जब देश में दलित, अल्पसंख्यक, हिंदू असुरक्षित हैं, लोगों में भेदभाव कायम है किसे देश प्रेम कहा जा सकता है। बंगाल में लाखों लोग बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन वहां के हिंदुओं की दशा न तो केंद्र सरकार न उनके चाहने वालों को दिख रही है। प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं,लेकिन मैं जन की बात करता हूं। 
उन्होंने कहा कि बंगाल पुनर्जागरण की धरती रही है, यहां से आवाज उठनी चाहिए कि बंगाल का एक बंटवारा हो चुका है और दोबारा हम बंटवारा होने नहीं देंगे। गरीबी,महंगाई, भूखमरी, सांप्रदायिकता से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश को कामयाब नहीं होने दें। तीन तलाक पर अदालत के फैसले से खुश होने वालों को अब अदालत पर भरोसा करना सीख लेना चाहिए। दूसरे मुद्दों को भी अदालत पर छोड़ दें। 

Friday, July 28, 2017

जेल में मोबाइल फोन बरामद होने से सुरक्षा पर सवालिया निशान






कोलकाता, 
 कोलकाता के अलीपुर सेंट्रल जेल प्रबंधन ने पांच दिनों तक जेल में तलाशी अभियान चलाकर 57 मोबाइल फोन और 1.5 किलो गांजा बरामद किया है। इस तलाशी अभियान के दौरान जेल का ऐसा कोई वार्ड नहीं था जहां से मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ हो। इतनी भारी संख्या में मोबाइल की बरामदगी ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि यह अभियान जेल अधीक्षक सौमिक सरकार, जेलर श्यामल तालुकदार, डिप्टी जेलर सोमनाथ भषचार्जी, हेड वार्डन पंकज रॉय और सुधांशु मुखर्जी के नेतृत्व में चलाया गया है। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भूतल पर स्थित वार्ड संख्या 9 से 12 मोबाइल फोन, पहले तल्ले पर 7 नंबर वार्ड से 22 मोबाइल फोन और एक किलो गांजा, इसी तल्ले पर वार्ड नंबर एक से 12 मोबाइल एवं पांच नंबर वार्ड से 9 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।  इसके अलावा एक पेड़ पर सूते से दो मोबाइल फोन बांधकर रखे गये थे। उल्लेखनीय है कि जेल के एक-एक वार्ड में कई कैदियों को रखा जाता है। यहां का 7 नंबर वार्ड सबसे बड़ा है जहां 130 विचाराधीन कैदियों को रखा गया है। इसके अलावा 9 नंबर वार्ड में 122 तथा पहले तल्ले पर एक नंबर वार्ड में 60 विचाराधीन कैदियों को रखा गया है। जेल सूत्रों से बताया गया है कि प्रत्येक वार्ड में करीब 80 से 100 कैदियों को रखा जाता है। ऐसे में यहां इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन बरामद होने से जेल प्रबंधन के माथे पर बल पड़ गया है।  जेल से भारी संख्या में मोबाइल फोन बरामदगी की सफलता जेल प्रबंधन को एक महिला के जरिए मिली है। बताया गया है कि पांच दिनों पहले जेल के बाहर एक महिला फोन पर बात कर रही थी। उस समय ड्यूटी पर सुशील सिंह नाम के एक हेड वार्डन ड्यूटी कर रहे थे। महिला को देखते ही वे पहचान गए थे। इसी जेल में बंद रमजान नस्कर की वह पत्नी थी। उन्हें संदेह हुआ कि शायद वह अपने पति से बात कर रही थी। इसके बाद वे उसके पास जैसे ही पहुंचे, उसने फोन बंद कर बैग में रख लिया। संदेह होने पर वे उसका फोन लेकर जेलर श्यामल तालुकदार के पास पहुंचे। उसके अंतिम कॉल पर फोन लगाकर वे रमजान के वार्ड की ओर बढ़े तो देखा कि वह फोन रमजान के पास ना होकर हतिम नस्कर के पास था। रंगे हाथ मोबाइल के साथ पकड़े गए हातिम से जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि महिला के पति रमजान के पास कोई मोबाइल फोन नहीं था इसीलिए वह हातिम के ही फोन पर फोन कर बात करती थी। इसी घटना के बाद जेल प्रबंधन सतर्क हो गया  और तलाशी अभियान चलाया गया जिसके बाद इतनी भारी संख्या में मोबाइल मिले हैं। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर किसी कैदी के पास से मोबाइल फोन मिलता है तो उसे 14 नंबर वार्ड में पनिशमेंट सेल में रखा जाता है। फिलहाल हातिम को भी उसी वार्ड में रखा गया है। इसके अलावा आगे से सतर्कता बरतते हुए जेल प्रबंधन ने निगरानी बढ़ा दी है।